बुधवार, 22 फ़रवरी 2012

यह अँधेरा क्यूँ है फिर आस पास ?

सूरज उगता है रोज़ एक सुनहरा,
चिड़िया रोज़ चेचाहती है,
बच्चे हंस के खिलखिलाते हैं,
यह अँधेरा क्यूँ है फिर आस पास ?

हर तरफ ज़िन्दगी भरी है,
हवा भी मंद मंद मुस्कुराती है,
चांदनी मैं रात को सितारे जगमगाते हैं
यह अँधेरा क्यूँ है फिर आस पास ?

कुछ लोग प्यार इतना बरसाते हैं,
ख़ुशी से आंसू छलछलाते हैं
दूर जाके भी दिल में रह जाते हैं,
यह अँधेरा क्यूँ है फिर आस पास ?

क्यूँ यह अँधेरा नहीं जाता,
क्यूँ रौशनी दिल मैं नहीं उतरती,
क्यूँ आँख नहीं मुस्कुराती,
क्यूँ आखिर यह मौत नहीं आती ?