मैं _ कौन हूं मैं
क्या है मेरी कहानी
मैं परी मेरी मां की
अजन्मी अभी , अभी हूं कुछ बाकी सी
क्या जाने मां मेरे बारे में सोचके
होती क्यूं चुप सी, रुआंसी
मैं खेलती , मां की गोद में महफूज़
बाहर आने की है बड़ी आस सी
पर जाने मां तारीख को देखकर
होती है क्यों बड़ी परेशान सी
भैया की खिलती हंसी
मुझे लगे बहुत मीठी सुरीली सी
पर दीदी का नाम सुनके
जाने क्यों होती मां उदास सी
मां ने मुझे एक दिन
बड़े प्यार से बुलाया
बाहर की दुनिया का बुरा हाल सुनाया
दीदी की आखरी चीख का शोर
मेरे रूह तक उन्होंने पहुंचाया
बंदिशों की कस्ती बेड़ियों
का दर्द महसूस करवाया
बोला मां ने परी मेरी
ना रखो तुम कोई उम्मीद कोई सपना
टूटेगा हर भ्रम तुम्हारा
हर त्याग पर नाम देख लो अपना
नोचेंगी जब आंखें तुम्हे कई
हर बार तुम्हे ही है धरती में बसना
सुना मैंने बाहर के अंधेरे को
देखा मैने मां की सिसकी को
आखरी सांस मेरी उखड़ी धीरे से
मां ने दी आखरी विदाई मुझको
