कौन हूं मैं???
सत्य बनके कंठ में करूं निवास
मां सरस्वती का वरदान हूं मैं
शिव की जटा से जो बहे
वोह पवित्र गंगा मां हूं मैं
हर शुभ कार्य में याद आए
वोह माता लक्ष्मी का शुभ लाभ हूं मैं
जो भगवान गणेश के साथ चले
वोह रिद्धि सिद्धि का नाम हूं मैं
सालों करके तप जो पाए शिव
वोह करुण पार्वती मां हूं मैं
पाकर भी जो दे दे बलिदान
वोह सती का अनंत रूप हूं मैं
ना समझना तुम ओ बंदे
की अबला बेचारी नारी हूं मैं
शेर पर सवार करू वार
देवी दुर्गा शक्तिशाली हूं मैं
मेरी हुंकार मात्र से भस्मे असुर
वो क्रोधित मां काली हूं मैं
नाम मेरे अलग अलग माने
कार्य मेरे विभिन्न हैं बंटे
परिस्थिति के अनुकूल मेरे रूप
अधिशक्ति बन, हर क्षण साथ में खड़ी
एक डोर से जुड़े इतने मोती
उस डोर को कहते हैं "स्त्री"
