साँस काटने सी लगी है
रिश्ता दबने से लगा है
प्यार है अब तक ज़िंदा
पर कफ़न बनने सा लगा है
ना कहती हूँ कुछ अब ज़ुबाँ से
ना आँखों में कोई कहानी है
जो सुनता था इस ख़ामोशी को
वह आँसू अब पानी है
इस अच्छे बुरे के शोर में
मासूमियत सेहम सी गयी है
इस सन्नाटे की आवाज़ में
ज़िन्दगी सिमट सी गयी है
रिश्ता दबने से लगा है
प्यार है अब तक ज़िंदा
पर कफ़न बनने सा लगा है
ना कहती हूँ कुछ अब ज़ुबाँ से
ना आँखों में कोई कहानी है
जो सुनता था इस ख़ामोशी को
वह आँसू अब पानी है
इस अच्छे बुरे के शोर में
मासूमियत सेहम सी गयी है
इस सन्नाटे की आवाज़ में
ज़िन्दगी सिमट सी गयी है
