शुक्रवार, 26 जून 2015

साँस काटने सी लगी है
रिश्ता दबने से लगा है
 प्यार है अब तक ज़िंदा
पर कफ़न बनने सा लगा है


ना कहती हूँ कुछ अब ज़ुबाँ से
ना आँखों में कोई कहानी है
 जो सुनता था इस ख़ामोशी को
वह आँसू अब पानी है

इस अच्छे  बुरे के शोर में
मासूमियत सेहम सी गयी है
इस सन्नाटे की आवाज़ में
ज़िन्दगी सिमट सी गयी है 
आज फिर उदास सा  यह दिल
मुस्कुराने की वजह ढूंढ़ता रहा
कुछ डूबता सा यह दिल
आज फिर कोई किनारा तलाशता रहा

 बिखरे हुए सूखे पत्तों के बीच
आज फिर बहार को तरसता रहा यह दिल
खोयी हुई राहों में
आज फिर मंज़िल ढूंढ़ता रहा यह दिल

 छुपी हुयी चंद खुशियों में
गम बटोरता  रहा यह दिल
महफ़िल की भरी हुयी साँसों में
आज फिर दम तोड़ता रहा यह दिल



मैंने ज़ंज़ीर में जकड़े देखा है
तूफ़ान में फँसे देखा है
दुखो में दबे देखा है


यह दिल फिर भी धड़कता है


मैंने  भीड़ में तनह देखा है
आँसुओं में मुस्कुराते देखा है
काँटों से चुबते देखा है

यह दिल फिर  भी धड़कता है

प्यार से ठुकराये  हुए देखा है
आँखों को पथराए हुआ देखा है
जीते जी मरते देखा है

कम्भख्त यह दिल फिर भी धड़कता है 
आँख में आंसू ठैरे
बहने की उन्हें इज़ाज़त नहीं
पलकों में नींद रुक सी गयी
सोने की फ़रमाईश हुई पूरी नहीं

सपने के बिखरे टुकड़े देखे
जुड़ने की जगह मिली ही नहीं
बहुत कोशिश की मगर
यह धड़कन बंद हुई ही नहीं 
शुक्रिया ए ज़िन्दगी तेरा
तूने फिर रोना सीखा दिया
इस सूखे हुए बाग़ में
बारिश का सैलाब आ गया


इस तीखे से दर्द ने मुझे
ऐसे झंझोड़ सा दिया
इस मरी हुई सी लाश को फिर
जीने का अभिशाप दे दिया

सुनी कभी तुमने ख़ामोशी की आवाज़
जैसे सन्नाटे में किसी की चीख
हुए कभी तुम खुदसे नाराज़
जैसे साँस मांगे मौत की भीक

रात के अँधेरे में चुप सी
दिन के उजाले में गुम सी
हर पल हर साँस कटे सोचते
कब आएगी मेरी आखरी तारीख 
आज दिल से चुपके से बोला
चल चले जाते हैं
आज फिर जब अपना खाता  खोला
देखा सब खाली नाते हैं 
Tooti rishton ki nazuk si dor
bikhre piroye huye moti
jaanu na jaana hai kis orr
na jaane kahan maine manzil chodi

kissi ki hansi gunji kaano main
kissi ki narazgi yaad aayi
koi chod gaya andhere main
kissi ke ruk jaane ki fariyad aayi
As the wind caused the trees to fall
and the bonds broke so strong
amidst the disaster I stood so tall
lines fading between right and wrong

The pain numbed my soul so deep
pieces of my life strewed around
with only loneliness in my keep
and sadness in the surround
नींद खुली जब आधी रात को
देखा तो बिस्तर भीगा हुआ था
सोचा ना जाने क्या टूटा आसमान में
पानी अपनी आँखों में छलका हुआ था 
अँधेरा है कितना गहरा 
रौशनी छुप गयी रात में 
तारे भी टूटे सपनो के और
और लग गया ग्रहण चाँद में 

समझी तब रौशनी  है रिश्तों जैसी 
पलक झपकते धुंधली हो जाती है 
यह अँधेरा है अपना साया 
आखिर तक साथ निभाता है 

और नहीं करना किसी उजाले से प्यार 
नहीं करना किसीका इंतज़ार 
टूटे तारे और छुपा चाँद 
यही अपनी जीत यही अपनी हार 


आँख हुई बंद तो फिर
दिखा सूरज का उजाला
खुली आँख तो देखा
वही अँधेरा घना काला

टूटे सपनो के भी सपने
आंसू बिछड़ गए मुझसे
खफा हुई दिल के अपने
अनजान हुई मैं खुदसे

जवाब दे गयी अब यह हिम्मत
इस जीने से तो मौत प्यारी
तुम्हे मुबारक तुम्हारी जन्नत
मैं अब दुनिया से हारी