शुक्रवार, 19 नवंबर 2021

दोस्ती

 मुस्कुरा रही थी मैं कल रात

देखा गाल गीले से हैं

क्या पता क्या हुई थी बात

जो आंखों से आंसू चल पड़े हैं


दोस्ती का मतलब पूछा उसने

आंसुओं को भी हंसी आ गई

मिल जाए जो मतलब इसमें

तो टूट जायेंगे भ्रम बढ़े बढ़े



सोच ही रही थी मैं यह बात

की बड़े जोर से आवाज आई

देखा मेरा भ्रम पड़ा था टूटा

दम तोड़ती दोस्ती ही थी जो कल रात.....

हल्के से मुस्कुराई ।






 चले थे हम दोनो साथ साथ 

आया एक अकेला सा चौराहा

धीरे से छूटा उसका हाथ

मैं उससे मुड़ते हुए देखता रहा


किसीने उससे वक्त कहा

किसीने कहा वो दोस्त है

किसीने कहा वो बदल गया

कोई बोला मौका परस्त है


मुट्ठी की जोर से  बंद मैने 

दिल पर रख दिया पत्थर

आंसू को बहने दिया मैंने

मुस्कुराहट को न हटने दिया मगर


मंजिल पर निशाना बनी नजर

अर्थ समझा मछली की आंख का

अंतरात्मा को जिंदा रखा मगर

चोला पहन लिया आखरी राख का