बुधवार, 25 नवंबर 2009

ज़िन्दगी - एक अनोखी राह !

ज़िन्दगी - एक अनोखी राह !!! 

ज़िन्दगी एक ऐसी राह है 
जिसकी कोई मंजिल नही, 
बस चलते जाना है इस पर, 
रुक पाए ऐसा कोई पल नही 


चलते चलते एक दिन
 ज़िन्दगी थक हार जाती है, 
तब आती है मौत दबे पाव, 
और चुपके से उसे ले जाती है /

मुक्त कर देती है मौत, 
इन्सान को हर गम से, 
ज़िन्दगी से सौ गुना अच्छी मौत, 
फिर भी इंसान ज़िन्दगी को तरसे

ऐसा क्यूँ होता है,
 इसपर मैंने विचार किया, 
ज़िन्दगी तो आज़ाद होती है,
मौत ने ही उसका शिकार किया

जिस तरफ़ चाहे इंसान, 
ज़िन्दगी को मोड़ सकता है, 
एक बार आ गया मौत के पंजे मैंने, 
न वोह हंस सकता है , न रो सकता है 

कितनी भी कोशिश कर ले इंसान, 
मौत से बचने की, बचता नही, 
पर जब ज़िन्दगी होती है हाथ मैं,
उसे सवारने के कोशिश करता नही

अगर पता है सबको, 
आज नही तो कल जाना है,
फिर क्यूँ अनजान बनता है 
क्यूँ मोह के पीछे भागता है 

 इंसान जैसे इस दुनिया मैं आया था,
वैसे ही चला जाएगा, 
खाली हाथ ही आया था, 
खली हाथ ही जाएगा 

पर इस छोटे से जीवन में, 
अगर वोह प्यार बरसायेगा, 
तो जाते jate हुए, 
किसी के जीवन मैं सुख और मन में याद छोड़ जाएगा /

गुरुवार, 19 नवंबर 2009

Friendship,
Does it exist?
Did it ever?
A lonely concept
no one willing to hear.

A genuine smile
a warm hug
a helpful hand
a heart full of love

someone holding our hand
no blood relation to his name
simply called a friend
there in smile and pain

one who's there always
to laugh in joy and
to wipe away tears
one who's a friend.

Friendship
Does it exist?
Did it ever?
a lonely concept
no one willing to hear.