शुक्रवार, 26 जून 2015

आँख हुई बंद तो फिर
दिखा सूरज का उजाला
खुली आँख तो देखा
वही अँधेरा घना काला

टूटे सपनो के भी सपने
आंसू बिछड़ गए मुझसे
खफा हुई दिल के अपने
अनजान हुई मैं खुदसे

जवाब दे गयी अब यह हिम्मत
इस जीने से तो मौत प्यारी
तुम्हे मुबारक तुम्हारी जन्नत
मैं अब दुनिया से हारी


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