बदले बदले क्या तो तुम बदले
बदलने को भी शर्म आ गई
फिसले फिसले क्या तो तुम फिसले
फिसलन भी फिसल के गिर गई।
ज़बान पर ऐसी मिठास
क्या इसी को कहते मीठा जहर
आंखों में ऐसी तेज धार
सरलता से कटे उसका सफर
ढूंढते नजरों से चारो ओर
कौन यह मीठा जहर घोले
बगल मैं चूरा और और बाहर ढिंढोरा
इसी को है शायद हम बोले

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