हर धूप को काटकर
छाया की ठंडक देती है माँ
हर हर दर्द को मेरे हटा कर,
प्यार का मरहम लगाती है माँ,
चोट जो लगी बचपन में
ज़मीन को "हट" करती है माँ
आंसू जो आया आँख में,
उसे मोती बनाकर सजोती है माँ,
कभी गुस्सा मुझे कर के,
खुद रो देती है माँ
मेरी एक ख़ुशी के लिए,
दर्द में मुस्कुरा देती है माँ
अपने आप को धुन्दला कर के,
मेरी ज़िन्दगी रोशन करती है मेरी माँ,
सांस भरी मेरे जीवन में,
मेरी हर सांस मैं है माँ,
प्यार से सींचा मुझे,
मेरे हर कतरे में माँ,
हर कण में, हर हलचल में,
मेरी आत्मा में है
मेरी माँ !!!

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