गुरुवार, 15 अगस्त 2024

Nanhi dor

 नन्हें से तुम आए

मासूम शरारत से भरे

धीरे से जब मुस्कुराए 

हुआ हमारा हर गम परे


छोटी छोटी खुशियों से

खिला हर कोना घर का

बिखरी प्यार की खुशबू

मन हमारा मंद मंद महका


बांधा सबको एसी डोर से

बिना किसी बल के,जोर के

तुम्हारी इस मोहक धुन से

हर धडकन हंस के धडके


दिया जिसने ये प्यारा तोहफा हमे 

उस भगवान को नमन मेरा

मेरी हर खुशी मिले विरासत मे तुम्हे 

बस इतनी सी है मेरी दआ 


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