सोमवार, 3 अगस्त 2026

 गांठ खुल जाए चाहे

सिलवट तो रह ही जाती है

टूटा शीशा चाहे जोड़ा जाए

दरार तो रह ही जाती है


दिल पर पढ़े पर्दा जब

तो रास्ता धुंधला हो ही जाता है

आए तेज़ धार जब नदी की

कमज़ोर सहर टूट ही जाती है


लेन देन आ गया जो बीच में

रिश्ता फीका पढ़ ही जाता है

दिया जो धुंधलाया भावनाओं का

अंधेरा और गहरा हो ही जाता है


समय जो एक बार बह गया

लौट के ना फिर पलटता है

रास्ता जो एक बार साथ छोड़ गया

फिर ना कभी मुड के मिलता है 



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