गांठ खुल जाए चाहे
सिलवट तो रह ही जाती है
टूटा शीशा चाहे जोड़ा जाए
दरार तो रह ही जाती है
दिल पर पढ़े पर्दा जब
तो रास्ता धुंधला हो ही जाता है
आए तेज़ धार जब नदी की
कमज़ोर सहर टूट ही जाती है
लेन देन आ गया जो बीच में
रिश्ता फीका पढ़ ही जाता है
दिया जो धुंधलाया भावनाओं का
अंधेरा और गहरा हो ही जाता है
समय जो एक बार बह गया
लौट के ना फिर पलटता है
रास्ता जो एक बार साथ छोड़ गया
फिर ना कभी मुड के मिलता है

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