गुरुवार, 15 जून 2023

 कण कण मे स्वर की हार

जीत के पहले आखरी सांस

मजिंल के आखरी पडाव पर

टूटती हौसले की आस 


वक्त की अंगुलियों के बीच से

फिसलती हुई उम्मीद की डोर

चांद ग्रहण का फैला अंधेरा

ना फूटती सूर्य की भोर


हारते मन की सिसक

नम आखों की मुस्कान 

खुशियों मे जश्न की चमक

गम मे जैसे सूना श्मशान 

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