सोमवार, 21 फ़रवरी 2022

 चले दो दोस्त मंजिल की ओर

हंसते गाते कटते थे पल

आया बीच रास्ते एक छोर

दाए मुड़ा एक दूसरा बांए दिया चल


एक ना थामा शांति को

चला भीड़ के संग संग

मूक बंधु बना हर गलती को

सही गलत से रहा वो मलंग


दूसरे रहा सदैव उत्तेजित

रहा संघर्ष में अकेला खड़ा

जो बात उसे लगी अनुचित

बेहिचक वो उसके विरुद्ध रहा अड़ा


चलते चलते बहुत दूर हुए

आंखों से हुए दोनो ओझल

अपनी अपनी राह लिए

दोनो तलाशते रहे उनकी मंजिल


 आया भेड़िया जंगल में

पहन के शेर का चोला

आयेंगे अब सब वश में

वो हंसते हुए खुद से बोला


चला चारो ओर सर उठा के

भागे सारे जानवर झटपट

सब दुबके डर से अपने बिल में

जैसे हुई हल्की सी आहट


बढ़ा भेड़िए का अभिमान

भूला किसका धरा है रूप

खुद को समझ बैठा महान

लगी उससे प्रसन्नता की भूख


मूह खोल के दहाड़ा भेड़िया

निकली लेकिन उसकी गुर्राहट

खुद के नशे में था वो इतना

सुनी नहीं उसने गुस्से की आहट


गुस्सा भड़का जिस दिन जंगल का

खड़े हुए रोंगटे भेड़िए के




 आवाज़ होती गई कड़वी

आंखों से उदारता उतर गई

दिल के मकान हुए खाली

हाथों से इंसानियत फिसल गई


होते थे जो रोबरू रिश्ते

वो मूंह फेर के चल दिए

साथ में थे जो हंसते

एक आंसू दिखा कि मुड गए 


मौका मिला क्या ज़रा सा

पल भर में दोस्तों ने  रंग बदले

रह गया आसमान धरा सा

ज़मीन खिसकी पैरों तले

 चांद को देख के पूछा मैंने

इतने सरल और शांत कैसे तुम

दुनिया को दूर से हो देखते

कैसे रखते इतना तुम सय्यम


चारो ओर मचा कोहराम

बिखरे लोग तितर बितर

लालच और आक्रोश हुआ बेलगाम

कोमलता ना दिखती अब इधर


बोला मुझे वोह मुस्कुराके

इसलिए रखता मैं धरती से दूरी

देखा अगर मैंने पास आके

सूरज की गर्मी भी लगेगी अधूरी






I wish

 I wish I was blind

To the destruction of morals

To the ignorance of the mind

To the death of inner souls



I wish I was deaf

To the harsh unkind words

To the eerie silence of life 

To the ugly spat among friends 


Lastly,

I wish I was dumb

And could let bitterness pass by

Let life speak for itself

And let my silent tears die


Let the heaviness of my heart

Lighten with kindess and joy

Wishing for the final peace 

My within bids goodbye

.

नया साल

 बेचैन सी मैं देखती रही

साल की आखरी रात को बीतते

आगे क्या होगा ,सोचती रही

फिर नई सुबह संभलते गिरते


पैरों के नीचे से जमीन खींची

कई दोस्तों, कई यारों ने

ईमानदारी तो बहुत सस्ती बिकी

ज़िंदगी के बाजारों में


बहुत पाठ पढ़ाए इस एक साल ने

चेहरे कई सफेद काले दिखाए

इस खिलते हुए बगान में

गुलाब सुंदर ने कई कांटे चुबाए


अगली सुबह नया सूरज उगेगा

चांद अपनी रोशनी बिखेरेगा

इसी उम्मीद पर हौसला खरा उतरेगा

इसी दर्द में नया सपना निखरेगा


Mera puchku

 वो मासूम सी हंसी

वो चमकती आंखें

वो खिलखिलाती ज़िंदगी

खींचे मेरे दिल के धागे


वो प्यार से गले लगाना

वो दौड़ के मेरे पास आना

वो प्यारी सी हम्मी देके

मेरे दिल को छू जाना


नन्हे हाथों से अपने 

लिख के मुझे दिखाना

कोमल कंठ से अपने

प्यार से मुझे पुकारना


फिर  कब आओगी मिलने

पूछे मासूमियत से यह सवाल

पत्थर रख के दिल पे मेरे

दिल तोड़ती उसका कितनी बार