सोमवार, 21 फ़रवरी 2022

 आया भेड़िया जंगल में

पहन के शेर का चोला

आयेंगे अब सब वश में

वो हंसते हुए खुद से बोला


चला चारो ओर सर उठा के

भागे सारे जानवर झटपट

सब दुबके डर से अपने बिल में

जैसे हुई हल्की सी आहट


बढ़ा भेड़िए का अभिमान

भूला किसका धरा है रूप

खुद को समझ बैठा महान

लगी उससे प्रसन्नता की भूख


मूह खोल के दहाड़ा भेड़िया

निकली लेकिन उसकी गुर्राहट

खुद के नशे में था वो इतना

सुनी नहीं उसने गुस्से की आहट


गुस्सा भड़का जिस दिन जंगल का

खड़े हुए रोंगटे भेड़िए के




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