आया भेड़िया जंगल में
पहन के शेर का चोला
आयेंगे अब सब वश में
वो हंसते हुए खुद से बोला
चला चारो ओर सर उठा के
भागे सारे जानवर झटपट
सब दुबके डर से अपने बिल में
जैसे हुई हल्की सी आहट
बढ़ा भेड़िए का अभिमान
भूला किसका धरा है रूप
खुद को समझ बैठा महान
लगी उससे प्रसन्नता की भूख
मूह खोल के दहाड़ा भेड़िया
निकली लेकिन उसकी गुर्राहट
खुद के नशे में था वो इतना
सुनी नहीं उसने गुस्से की आहट
गुस्सा भड़का जिस दिन जंगल का
खड़े हुए रोंगटे भेड़िए के

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