आवाज़ होती गई कड़वी
आंखों से उदारता उतर गई
दिल के मकान हुए खाली
हाथों से इंसानियत फिसल गई
होते थे जो रोबरू रिश्ते
वो मूंह फेर के चल दिए
साथ में थे जो हंसते
एक आंसू दिखा कि मुड गए
मौका मिला क्या ज़रा सा
पल भर में दोस्तों ने रंग बदले
रह गया आसमान धरा सा
ज़मीन खिसकी पैरों तले

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