सोमवार, 21 फ़रवरी 2022

 आवाज़ होती गई कड़वी

आंखों से उदारता उतर गई

दिल के मकान हुए खाली

हाथों से इंसानियत फिसल गई


होते थे जो रोबरू रिश्ते

वो मूंह फेर के चल दिए

साथ में थे जो हंसते

एक आंसू दिखा कि मुड गए 


मौका मिला क्या ज़रा सा

पल भर में दोस्तों ने  रंग बदले

रह गया आसमान धरा सा

ज़मीन खिसकी पैरों तले

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