वो मासूम सी हंसी
वो चमकती आंखें
वो खिलखिलाती ज़िंदगी
खींचे मेरे दिल के धागे
वो प्यार से गले लगाना
वो दौड़ के मेरे पास आना
वो प्यारी सी हम्मी देके
मेरे दिल को छू जाना
नन्हे हाथों से अपने
लिख के मुझे दिखाना
कोमल कंठ से अपने
प्यार से मुझे पुकारना
फिर कब आओगी मिलने
पूछे मासूमियत से यह सवाल
पत्थर रख के दिल पे मेरे
दिल तोड़ती उसका कितनी बार

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