हंसते हंसते रुकी मैं
गीले गालों को हैरानी से देखते
थक के जब हार बैठी मैं
गुजरे हुए रास्ते को देखा
लम्हे हसीन करते हुए याद
उन्हे दिल खोलके देखा।
छुपे हुए जज्बातों को मैंने
चुपके से सिसकते देखा
दोस्तों को पलक झपकते
राह बदलते मैने देखा
तो अजनबी को ज़िंदगी में
चारो और इत्र बिखेरते देखा
कहानी बड़ी दिलचस्प सी
ज़िंदगी को मैंने गौर से देखा
जीत को हार में और हार में जीत
हर बार एक नए नज़रिए से देखा

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