हर बार बिजली कड़कने के बाद
बारिश आए जरूरी तो नहीं
हर बार आंसू बहाने के बाद
ज़िंदगी मुस्कुराए जरूरी तो नहीं
हार के हर सफर के बाद
जीत आए हाथ जरूरी तो नहीं
पीछे चलता कछुआ
जीत ही जाए जरूरी तो नहीं
ढूंढते हुए ,रोशनी की करते तलाश
अंधेरा छट जाए जरूरी तो नहीं
पर उस अंधेरे से डर के वो रोशनी
अपनी लो ना जलाए वो रोशनी भी तो नहीं
सालों दोस्ती निभाने के बाद
वो साथ निभाए जरूरी तो नहीं
पर साथ की आस में जो हो रिश्ता
वो फिर दोस्ती भी तो नहीं ।

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