सोमवार, 21 फ़रवरी 2022

वाणी

 वाणी पर रखना संयम 

मां ने सिखाया बचपन में 

शब्दों के होते हैं गहरे ज़ख्म 

होती है बहुत तेज़ धार उनमें


बोलते हैं कलम की ताकत 

होती ज्यादा तलवार से

पर सुर जो देता है सिसक

होता सबसे ज्यादा जहर उसमे


औकात की बात जो कर दे

अपने उड़ते अभिमान में

स्वर जो ना रख पाए काबू में

अपशब्द फिसले जिसकी जुबान से


जीते वो कितने ही युद्ध

हारे वो अपने सबसे करीबी 

जीत गया जिससे उसका क्रोध

उसकी कोई भी जीत की कीमत कैसी 


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